हिजोका अनुपस्थित
-------आस्था
-------र खुशीहरु,
आँचलमा शुद्धताको
........रेखीबुट्टा हालेर
----------नयाँ सम्बतमा
-------------प्रेम प्रस्ताबको
--------------रंगिन-पत्र बोकी
----------------अब आँउनै पर्छ l
जीवन-चर्खामा संधैं
कातिएको काँचो धागो,
--------खेस र गिम्तीको
------तानमा सीमित नहुन्,
अब,
-------बेलाको रेशमी खेतीले
--------मलमल जीवनको शुद्ध
---------युगिन वस्त्र फेरिनु पर्छ l
--यातनाको सन्सारमा
-----जानेर पनि नजानी
--------दिशा भ्रमित......
------------पथहरुमा हिंड्ने
-----धर्मवीर युधीष्ठिरहरु हो !
-----------------ब्रम्हानेत्र खोलेर
अब,
-------------कोलम्बस भएर हिड्नू,
-------------------सुन्दर संसार भेटेर
-----------------------कर्मवीर योद्ध हुनू !
--------अकालको------
--------शिकारबाट------
छुटेर शान्तिका परेवाहरु
-----सभ्यताको गुँडमा.....
-----मायावी धुन घुर्दै----
चिरकालसम्म रमाउन् l
----अब उपरान्त---
कविताको विम्बमा
रुकुम, रोल्पा नपरोस,
मेरो अध्याँरो भूगोलमा
---बिमुखको रापिलो---
---अग्निकुण्ड निभेर---
---नविन उन्मुखको---
--------अपार--------
पृथ्वी--सम्म--खारियोस l
बेईमान
----र----
वैभावको
-अग्लो-
पहाडबाट
---झरेर---
--धुमिलो--
आकाशको
जून पखाल्न
----अब----
---इमान---
-----र---
--समान--
धरातलको
सहयात्रामा
आजै निस्कौं l
* खेस, गिम्ती = परम्परागत कपडा बुनाईको (लुम) तानको प्रकार साधा बुनाईलाई खाँडी भनिन्छ भने त्यसमा थोरै लुमहरु मिलाएर उही धागोको मसिनो बुट्टा निकालिएकोलाई खेस र गिम्ती भनिन्छ l
* सम्म--खारियोस= मैदान होस् l
मनु लोहोरुङ्
०१/०१/२०६७




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